Very Short Moral story (Hindi Kahaniyan)
Very Short Moral story (Hindi Kahaniyan) - aaj ham aapko batane jaa rahe hain,
Very Short Moral story (Hindi Kahaniyan), jisme aapko Entertainment ke saath sath Bahut kuch sikhne ko bhi milega.
एक राज्य था, मध्यप्रदेश। वहाँ एक राजा रहते थे, जिनका नाम था, श्री पुष्कर सिंह । पुष्कर सिंह थोड़े मूर्ख किस्म के राजा थे।
पर अपने राज्य को सुख संपत्ति से पूर्ण रख लेते थे। राजा के राज्य के ही एक करीबी थे, अशोक सिंह । अशोक सिंह राजा के करीबी होने के साथ साथ राज्य के राजवैध भी थे।
राजवैध थोड़े गुस्सेल किस्म के व्यक्ति थे।
मानसून का समय आ चुका था, पूरे राज्य में शीतलहर दौड़ रही थी।
राजा पुष्कर ने राज्य के कामकाजों के लिए 150 अच्छी किस्म के हाथी मंगाए थे, उनका पालन पोषण अच्छा ही चल रहा था कि, अचानक राज्य में लाए गए हाथी बीमार पड़ने लगे।
वे न ही ढंग से खाना खा रहे थे, और न ही समान ढो पा रहे थे।
यह सूचना राजा पुष्कर के पास पहुची। राजा पशुप्रेमी थे, और पशुप्रेमी होने के कारण वे बहुत परेशान हो गए।
उन्हें कुछ समझ नही आ रहा था, कि हाथियों को क्या हो रहा है?
उन्होंने राजवैध को अपने महल में बुलवाया, राजवैध अशोक सिंह महल से दूर एक कुटिया में रहते थे।
राजवैध को जैसे ही पता चला, राजा ने मुझे हाथियों के उपचार के लिए राजमहल बुलाया है, उन्होंने कुछ दवाइयां अपने थैले में डाली, और वह अगले दिन ही राजमहल निकल लिए।
महल जाते समय उन्होंने सोचा, क्यों न में जंगल के रास्ते हि महल तक जाऊं, जल्दी भी पहुच जाऊंगा, और रास्ते मे कोई खाने के लिए फल या जड़ीबूटी भी मिल ही जाएगी।
महल बहुत दूर था, राजवैध आधे रास्ते तक ही पहुचकर थक गए। और वहीं खाना खाकर एक पेड़ की छाया में सुस्ताने के लिए लेट गए।
अचानक कहीं से एक कौवा, राजवैध के ऊपर एक डाली में आके बैठ गया। और राजवैध के मुह के ऊपर कौवे ने अपना मल मूत्र त्याग दिया।
राजवैध जब उठे, और उन्होंने अपने मुह में देखा, तब उनको बहुत गुस्सा आ गया। उनकी आँखें क्रोध से भर गई।
उन्होंने उस कौवे को पकड़ने की बहुत कोशिश की, ओर बहुत पत्थर भी मारे, पर कौवा वहां से उड़ गया।
उन्होंने इस कौवे को पकड़कर मारने के लिए एक तरकीब सोची, कि क्यों न मैं राजा से कहूँ, हाथी कौवों की चर्बी से ठीक हो जाएंगे, ऐसे में राजा सारे हाथियों को मरवा देगा।
जब वह राजमहल पहुचे, तब देखा राजा बहुत परेशान थे। राजा ने राजवैध को सारी बाते बताई, और कहा, तुम कृपया करके इन सारे हाथियों को ठीक करो, में तुम्हारा बहुत आभारी रहूंगा।
इतने में राजवैध हाथियों के पास गए, और कुछ देर तक हाथियों को देखने के बाद, राजा के पास आकर बोले, राजा में इन हाथियों की बीमारी समझ गया हूं, यह बीमारी केवल एक ही चीज से ठीक हो सकती है, और वो है कौवों की चर्बी, और वह भी अधिक मात्रा में।
राजा पशुप्रेमी होने के बाद भी बेशकीमती हाथियों के9 बचाने के लिए कौओं को मरवाक़े, उनकी चर्बी को लाने का आदेश अपने सेनापति को दे देता है।
सेनापति ऐसा ही करता है, वह कई सारे कौवों को मरवाता है, और राजवैध के पास भेजता जाता है।
जंगल मे ही एक शिकारी बिल्ला होता है, उसे इतने सारे कौवों को मरते देख , बहुत दया आ जाती है।
वह राजा के पास जाता है, और बोलता है, हे महाराज आप इन कौवों को क्यों मार रहे हैं?
राजा बोलते हैं- दुष्ट तेरा दुःसाहस कैसे हुआ, इस मामले में बोलने का।
बिल्ला- महाराज में शमा चाहता हु, पर में केवल यह जानना चाहता हूं, कि आखिर ये कौवों को इतनी बेदर्दी से क्यों मारा जा रहा है?
तब सेनापति बोलता है, राजवैध ने बोला है, हमें अपने हाथियों को ठीक करने के लिए कौवों की चर्बी चाहिए। वह भी ज्यादे मात्रा में।
तब बिल्ला कुछ देर सोचने के बाद बोलता है, पर महाराज कौवों में तो चर्बी होती ही नही है, महल में जितने भी लोग बैठे थे, सब यह सोचने पर मजबूर हो गए, कि आखिर इतनी बड़ी भूल हमसे कैसे हो गयी?
राजा को अपनी गलती का एहसास होता है, वह अपने किसी स्वार्थ के लिए, इतने सारे कौवों को मरवाने के लिए राजवैध को उम्रकैद दे देता है।
सीख- सोच समझकर काम करना चाहिए. (Should work thoughtfully).
Conclusion-
aaj aapne jaani Very Short Moral story (Hindi Kahaniyan) me ek murkh raja ki kahani, ummid karte hain, aapko esser bahut kuch sikhne ko mila hoga.
Very Short Moral story (Hindi Kahaniyan) jesi or kahaniyan janne ke liye bane rahiye hamare saath.
thanks...!


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